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शून्य-3 / प्रदीप जिलवाने

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शून्य
सिर्फ शून्य नहीं होता
होता तो
यूँ लटकता हुआ दिखायी नहीं देता
माथे पर
हथोड़े की तरह
ठन - ठन चोट करता हुआ।

शून्य
सिर्फ शून्य होता तो
इतिहास में कहीं भी दर्ज नहीं होता
शून्य का कोई किस्सा
और सभ्यताओं के विकास में शून्य का हिस्सा।

शून्य
सिर्फ शून्य नहीं होता
होता तो
चीजों को एक से दस नहीं करता।

और फिर
ज्यादातर उधर क्यों खड़े होते
जिधर ज्यादा शून्य होते।

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