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सदेई / तारादत्त गैरोला

जाड़ो तसिगे[1] प्रकृति बिजिगे[2],
पशु वा पंछी सभी जी गयेन।
जाड़ान जो सुन्न न होई गै तो,
स्यो बौड़ि[3] गे ल्वै रस सार प्राण।
डाली व बोटी वण व वणोंदी,
निर्लज्ज जाड़ान करेति नांगी।
अनेक पैरया ालेन अब रंग की,
बसन्त का स्वागत कत साड़ी।
गाड[4] गधेरा[5] अर पंछी पौन,
छया जो जाड़न सुन्न होया।
कर्ण बसे कोलाहल लगि गैन,
खुशी बसन्त की मनौण लैन।
शरीरो कलेजा पहुँचौंण रायावायु,
स्या घैंत स्वाणी[6] अब लागदे छ।
सुगन्ध फूल[7] दगड़े मिलीक,
अमृत पिलाई पुलकौंद पौन।
सफेद रत्ता[8], पिंगला व नीला,
भांति व भांति छन फल फूल्या।
समीन्न यून प्रकृति पुरुष सी,
सजाई दीने रति रंग भूमि।
कुलूड़ि भि फूलि अर फ्यू ली फूली,
गयेन फूली वण वो वणोंदी।
गुलाब फूल्यों अर कूजों फूल्यो,
फूली गयेन लगुले[9] व झाड़ी।
आरु, घिंघार अर आम डाले,
निम्बू नारंगी भित फूलि गैन।
चम्पाभि, पाईभि चमेलि फूलि,
बुरांस घारूँ मंग अंचि फूल्यों।
सिलंग फली सब ठौर फूली,
गईन फूटि कलि कोंपलें भी।
क्या घर क्या बोण[10] सभी जगौं मां,
सिलंग की बास सुवास फैली च।
छन रंग नया / ताजा अर रंग नाना,
सुवास नाचा अर गीत नाना।
अनेक नाना विधि का न स्येन,
वि दिखेंद, सूंघेंद, सुणोंद जा ना।
गीतु सुरिला छन पंछी गाणा,
वीं कोकिला की पर प्यारि थक।
सुणोंद चारू दिशि दूरु-दूरु,
दुखौंद ज्यू कू सहदेई कोछ।
पंछी तु गाला छई मास ओरे,
चेड़ो[11] कफू[12] बासलो चैत मास
सिलंग डाली पर फ्यूँलि गाली,
ना पास केकु ज्युकड़ी[13] झुरौंद।
हल्या रयों मां छन मस्त रौंकणा,
पाख्यों घस्यारे छन गीत गाणी।
लगादू भौणे छन गीतू मांगे,
स्वालू जवाब हुह्रौंण लागी।
रैबार[14] रै पार हिलांस[15] प्यारी,
कू-कू करी कूकद लवि कू-कू।
झणन्यालि गैरी-छ गदरियों मां,
स्या म्योलड़ी भी कना गीत गाणी।
भौंरा छया जो सुनसान ब्याले,
स्ये आज फुलू-फुल मांन गुजराण।
यैं फुल की केशरी फुल वै मां,
लिजाण लाग्यां छन स्वार्थि भौंरा

इनी निराली अर भांति भांति,
छ काम होणु प्रकृति पुरुष को।
सृष्टि छ सारी उत्सौव मनोणी,
खुशी मनौणी खिलखील हंसणी।
बसन्त ए मा रज ताल-बात,
आयुँ छ गर्भाषय वीजु मांगे।
जणन कु जन्तु-जननी जनक को,
छ जग-जोड्यूँ जजग मांग गां तां।
सिलंग नीस[16] सहदेई बैठी,
सुणणी छ देखणी बण की बहार।
सैं मैलि डाली मुं सदानि औंदे,
खुदेड़ सैदी खुद बिसरौण।
सैदी कु औदे जब याद मैतै,
दगड्[17] याणियों की भि छ याद औंदा।
वणू वणोंडो कि भि याद औंद,
धारू व गाडू कि भि याद औंदा।
चौंरी[18] माँ बेठी च खुदेड़ सैदी,
बौली सी होई खुद से सदेई।
चड़ी सी रोटी भोर भरि ज्यू स्या रोंदे,
इना इना वैन सुबैन बोदे।
हे ऊँचि डांडयों[19] तू नीसी[20] आवा,
धणी कुलांयों[21] तु छांटि जावा।
मैं ते दगीं छ खुद[22], मैतुड़ा[23] की,
बाबाजी को देखण देश देवा।
मैतअकि मेरी तु पौन[24] प्यारी,
सुणों त रैबार[25] तु मां को मेरी।
गाडू-गदअन्यों[26] व हिलांस[27] कफ्फू,

मेतअका मेरा तुम गीत गावा।
वारअ ऋतु बौड़लि[28] बार मास,
आली व जाली जनि दाई[29] फेरो।
आई निजाई निरभाग मैं कू,
क्वी मी नि आई ऋतु मेरी दात[30]
बसन्त मैना ासब का त माई,
मेटेंण आला वहिण्यों कु अपणी।
दीदी-भुली-मिलीक गीत गालो,
गला लगाली खुद विसराली।
मैत्यों कि भेजी कपड़ों की छाल,
पैलीं विसाली कनु से मिजाज।
लड्यालि[31] मेरो कुई माई होंदो,
कलेऊ लौंदो व दुरौंदो पैणा[32]
लठ्यालि होलो निरमाग मै त,
पीठी नि की होयन माई-वैणा।
करीं पछिंण्डि छऊँ धौलि[33] पार,
गाऊ विदेशी, अर दूर देश।
जवान ह्वै गयूं, लड़कालि[34] भी गयूं,
मेरी करी नी कैन खबर न सार।
मैतअकि देवी छऊँ, झाली-माली,
मेरी सुणियाल विपत्ति भारी।
दियाल मैंकु इक भाई प्यारो,
देखीक जैकु खुद बिसरौं में।
भाई की मुखड़ी जब देखि लेंदो,
होंदो सुफल जीवन यो त मेरो।
मैं कूत नी छ कुछ और इच्छा,
समान भाई नोछ, और नी छ की भी।

देली तु जो यो वर आज मैंकू,
मैं देउलो त्वै सरवाच देवी।
जो भाई होलो तो अठ्वाड़ धूलो,
पंडौङ नचौलो अर जात धू लो।
खोंदू अभी नितर प्राण अपणों,
सहाय ह्वै जा दुर्गा-भवानी।
देवी भवानी जननी जगत की,
प्रसन्न होंदे वर तैंकु देंदे।
होलो सदेउ इक भाई तेरो,
बड़ो प्रतापी मिललो वो त्वैकू।
आकाशवाणी इन वीं न सुणी,
सुपनों छ यो या भरमौंणु की मैं।
या मेरी होली कुल इष्ट देवी,
दन्दौल[35] नाना बिधि कर्दी मनमां।
गई सदेई जब सांझ होये,
सिलंग डालि सणी भेंट देण।
धर्दी छ वा धीरज शांत होंदें,
लगदे छ धन्धें पर स्थान धरका।

शब्दार्थ
  1. बीत गया
  2. जाग गयी
  3. लौट गये
  4. नदी
  5. नदिया
  6. सुन्दर
  7. साथ
  8. लाल
  9. लता
  10. वन
  11. पक्षी विशेष
  12. पक्षी
  13. हृदय
  14. सन्देश
  15. पक्षी
  16. नीचे
  17. सहेलियों
  18. चबूतरा
  19. पहाड़
  20. नीचे
  21. चीड़
  22. याद
  23. मायका
  24. पवन
  25. सन्देशा
  26. नदी-नाले
  27. पक्षी विशेष
  28. लौटान
  29. गेहूँ जौ की मंडाई
  30. समय
  31. संबोधन, बेचारो
  32. बाँटने के लिए कलेवा
  33. नदी का नाम
  34. बचपन
  35. विचार