भारतीय साहित्य के विशालतम ऑनलाइन संग्रहालय से कुछ आंकड़े (...और गिनती जारी है!)
कविता कोश: 57000+ कुल पन्नें; 2,000+ रचनाकार; 25,000+ कविताएँ; 10,000+ ग़ज़लें; 3,000+ गीत/नवगीत; 1,500+ नज़्में | 125,000+ आगंतुक/माह; 20,000,00+ रचना-पठन/माह
गद्य कोश: 7,000+ कुल पन्नें; 500+ रचनाकार; 1,500+ कहानियाँ; 600+ लघुकथाएँ; 100+ उपन्यास; 600+ आलेख; 300+ निबंध; | 20,000+ आगंतुक/माह; 1,000,00+ रचना-पठन/माह
© कॉपीराइट योगदानकर्ता कविता कोश टीम

समुद्र और चांद / आलोक धन्वा

Kavita Kosh से
यहां जाएं: भ्रमण, खोज


जब समुद्र उठ रहा था चाँद की ओर
पश्चिम भारत के अंतिम किनारे पर
उस शाम मैंने उसे देखा

और चाँद
ट्राम के पहिए जितना बड़ा
और वह शहर कलकत्ता बहुत दूर
जहाँ ट्राम चलती है

समुद्र उठ रहा था चाँद की ओर
उस तरह सिर्फ़ घोड़े ही उठ सकते हैं
जैसे वे दिखते ही तब हैं
जब वे दौड़ते हैं

समुद्र उठ रहा था चाँद की ओर
मैं बिलकुल पास ही खड़ा था
एक ऐसा अकेलापन एक तनाव
रोने की भी इच्छा हुई
लेकिन रुलाई फूटी नहीं

और किस तरह रात आ रही थी
उतनी ऊँची लहरों में
कहीं दिख नहीं रही थी
मेरी पुरानी कमीज़ के सिवा

देर तक वहाँ टिकना मुश्किल था
बम्बई के भीतर लौट।


(1990)

वैयक्तिक औज़ार
» रचनाकारों की सूची

गद्य कोश

» हिन्दी में अनुवाद

» विभाग

» भाषाएँ और भी

» महत्त्वपूर्ण संदेश
  • फ़िलहाल नए आवेदन स्वीकार नहीं किए जा रहे हैं। कृपया अपनी रचनाएँ कोश में जोड़ने के लिए अभी आवेदन न करें। आगे की सूचना इसी जगह प्रकाशित की जाएगी।
  • कविता कोश से संबंधित हर जानकारी पाने के लिए पढ़ें: कविता कोश: हिन्दी काव्य में जुड़ता एक नया आयाम

» प्रादेशिक कविता कोश

» अन्य महत्त्वपूर्ण पन्नें

» अन्य पन्नें