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<div style="font-size:120%; color:#a00000; text-align: center;">
दर्द की रात ढल चली है</div>
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खुले तुम्हारे लिए हृदय के द्वार</div>
  
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रचनाकार: [[फ़ैज़ अहमद फ़ैज़]]
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रचनाकार: [[त्रिलोचन]]
 
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<div style="background: #fff; border: 1px solid #ccc; box-shadow: 0 0 10px #ccc inset; font-size: 16px; margin: 0 auto; padding: 0 20px; white-space: pre;">
बात बस से निकल चली है
+
खुले तुम्हारे लिए हृदय के द्वार
दिल की हालत सँभल चली है
+
अपरिचित पास आओ
  
अब जुनूँ हद से बढ़ चला है
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आँखों में सशंक जिज्ञासा
अब तबीअत बहल चली है
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मिक्ति कहाँ, है अभी कुहासा
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जहाँ खड़े हैं, पाँव जड़े हैं
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स्तम्भ शेष भय की परिभाषा
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हिलो-मिलो फिर एक डाल के
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खिलो फूल-से, मत अलगाओ
  
अश्क ख़ूँनाब हो चले हैं
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सबमें अपनेपन की माया
ग़म की रंगत बदल चली है
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अपने पन में जीवन आया
 
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लाख पैग़ाम हो गये हैं
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जब सबा इक पल चली है
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जाओ, अब सो रहो सितारो
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दर्द की रात ढल चली है
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जुनूँ=दीवानगी;
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अश्क=आँसू;
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ख़ूँनाब=लहू के रंग
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19:38, 7 मार्च 2015 के समय का अवतरण

खुले तुम्हारे लिए हृदय के द्वार

रचनाकार: त्रिलोचन

खुले तुम्हारे लिए हृदय के द्वार अपरिचित पास आओ

आँखों में सशंक जिज्ञासा मिक्ति कहाँ, है अभी कुहासा जहाँ खड़े हैं, पाँव जड़े हैं स्तम्भ शेष भय की परिभाषा हिलो-मिलो फिर एक डाल के खिलो फूल-से, मत अलगाओ

सबमें अपनेपन की माया अपने पन में जीवन आया