भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए

सूरजमुखी का फूल / एकांत श्रीवास्तव

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

फिर आ गए है फूल सूरजमुखी के
भोर के गुलाबी आईने में झाँकते
चीन्‍हते
जानी-पहचानी धरती

जैसे द्वार पर पहुँचे हुए पाहुन
वे आ गये हैं
इस बार भी
अपने समय पर

जब सिर्फ सूचनाएँ आ रही हैं हत्‍या की
बाढ़, अकाल और
महामारी में मरने वाले लोगों की
देखते-देखते एक बसे बसाए शहर के
धुएँ और राख में बदलने की

ऐसे दुर्गम समय में
आ गए हैं
फूल सूरजमुखी के।