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सो जा वा रे वीर तुम तो सो जाओ वा रे वीर / बुन्देली

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   ♦   रचनाकार: अज्ञात

सो जा वा रें वीर, तुम तो सो जाओ वा रे वीर।
बीरन की बलैयां ले गईं जमुना के तीर।।
वर पे डाले पालना, पीपल पे डारी डोर।
जो लों कन्हैंया सोवन लागे ऊपर बोली मोर।
सो लो मोरे लाड़ले, तुम जब लो होने भोर।
आवत-जावत झोंका देहों, कबहूं न टूटे डोर।
माई गई है मायके, बीरन गये ससुराल।
भैया गयें हैं चाकरी, भाभी ठांढ़ी द्वार।
ताती-ताती खीर बनाईं, जामे डारो घी।
दो कौर खा लो लाड़ले, ठण्डो पड़ जाये जी।