भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

हम वतनी / हरीश करमचंदाणी

Kavita Kosh से
Lalit Kumar (चर्चा | योगदान) द्वारा परिवर्तित 22:13, 1 अक्टूबर 2016 का अवतरण ('{{KKGlobal}} {{KKRachna |रचनाकार=हरीश करमचंदाणी |अनुवादक= |संग्रह= }...' के साथ नया पृष्ठ बनाया)

(अंतर) ← पुराना अवतरण | वर्तमान अवतरण (अंतर) | नया अवतरण → (अंतर)
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

बुध, मुंहिंजो आवाजु़ बुधु
सरहद जे हुन पार खां
तो सां मुख़ातिब आहियां
तो सां गुडु न गुज़ारियो अथमि
हिकु बि पलु,
तुंहिंजो चेहरो बि
न ॾिइो आहे कॾहिं मूं
पर इहो पतो अथमि त
जेकर इहा लकीर
न छिकिजे हा
त अजु असीं
गडु हुजूं हा!
हिक जहिड़े ढंग सां
न सोचियूं हा बेशक
पर
सुख दुख गडु जीऊं हा,
पक।