भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

10 / हीर / वारिस शाह

Kavita Kosh से
Lalit Kumar (चर्चा | योगदान) द्वारा परिवर्तित 17:14, 29 मार्च 2017 का अवतरण ('{{KKGlobal}} {{KKRachna |रचनाकार=वारिस शाह |अनुवादक= |संग्रह=हीर / व...' के साथ नया पृष्ठ बनाया)

(अंतर) ← पुराना अवतरण | वर्तमान अवतरण (अंतर) | नया अवतरण → (अंतर)
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

बाप करे पयार ते भाई वैरी डर बाप दे हथों पये संगदे ने
गुझे मेहणे मारदे सप वांगूं उसदे कालजे नूं पये डंगदे ने
कोई वस ना लगदा कड छडन देंदे मेहणे रंग बरंग दे ने
वारस शाह एह गरज है बहुत पयारी होर साक ना सैन ना अंग दे ने

शब्दार्थ