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141 / हीर / वारिस शाह

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चूचक आखया लंडयां जाह साथों तैनूं वल है झगड़यांझेड़यां दा
तूं सरदार हैं चोरां उचकयां दा सूहा बैठा एं महानूआं भेड़यां दा
तैनूं वैर है नाल अजानयां दे अते वैर है दब दरेड़यां दा
आप छेड़ के पिछड़ें दी फिरन रोंदे एह चज है माहणूआं[1] फेड़यां दा
वारस शाह इबलीस[2] दी शकल कैदी एह मूल हैसब बखेड़यां[3] दा

शब्दार्थ
  1. मनुष्य
  2. शैतान
  3. झगड़े