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206 / हीर / वारिस शाह

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लिखया विच किताब कुरान दे जी गुनाहगार खुदा दा चोर है नी
हुकम माउ ते बाप दा मंन लैना जेहड़ा राह तरीकत[1] दा ज़ोर है नी
जिन्हां ना मनया पछोतावणगे पैर देखके झूरदा मोर है नी
जो कुझ माउं ते बाप ते असीं करीए ओथे तुध दा कुझ ना ज़ोर है नी

शब्दार्थ
  1. मरियादा