Last modified on 29 मार्च 2017, at 17:32

25 / हीर / वारिस शाह

केहा भेड़ मचाया ई कचया वे मत्था डाहया ई सौंकनां वांग केहा
जाह सजरा कम्म गवा नाहीं हो जासीया जोबन फेर बेहा
रांझे खा गुस्सा सिर धौल मारी केही चबड़ी उस नूं जिवें लेहा
रांझा हो गुस्से उठ रवां<ref>चल पड़ा</ref> होया भाबी रख ओह तां नांह रेहा
हत्थ पकड़ के जुतियां मार बुकल रांझा हो टुरया वारस शाह जेहा

शब्दार्थ
<references/>