भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए

थांरी ओळयूं / आशा पांडे ओझा

Kavita Kosh से
आशिष पुरोहित (चर्चा | योगदान) द्वारा परिवर्तित 02:20, 28 अक्टूबर 2016 का अवतरण ('{{KKGlobal}} {{KKRachna |रचनाकार=आशा पांडे ओझा |अनुवादक= |संग्रह=था...' के साथ नया पृष्ठ बनाया)

(अंतर) ← पुराना अवतरण | वर्तमान अवतरण (अंतर) | नया अवतरण → (अंतर)
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

घणी लुभावणी लागै
इण जूण मरूथल री
सुळगती परसां में
कदै-कदास
बिरखा री बूंद ज्यूं
छानै-छुरकै
छिण-दो छिण
जद कदै
आय मिलै
म्हां सूं
थांरी ओळयूं
नस-नस में
रम जावै जद
जाणै कितरा ई
सावण।