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दिल्ली मैट्रो दो / रजनी अनुरागी

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दो

मैट्रो में चढ़ते ही लड़के और लड़कियाँ
सटा लेते हैं कानों पर इयर फोन
और सुनते रहते हैं जाने क्या-क्या
करते रहते हैं बातें
धीरे - धीरे, गुपचुप, गुपचुप

कभी बिंदास खिलखिलाएंगे
और साथ यदि पूरा ग्रुप हो
तो सारे मेट्रो कोच को सर पर उठाएंगे
सुविधाजनक वातानुकूलित सफ़र में
पूरा मस्त हो जाएंगे
इग्ज़ाम डेज़ में पूरी तल्लीनता से पढ़ते नज़र आएंगे
मगर इयर फ़ोन फिर भी नहीं हटाएंगे