भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए

राष्ट्रिय चरित्र / केदारमान व्यथित

Kavita Kosh से
Sirjanbindu (चर्चा | योगदान) द्वारा परिवर्तित 14:27, 19 जुलाई 2017 का अवतरण ('{{KKGlobal}} {{KKRachna |रचनाकार=केदारमान व्यथित |अनुवादक= |संग्र...' के साथ नया पृष्ठ बनाया)

(अंतर) ← पुराना अवतरण | वर्तमान अवतरण (अंतर) | नया अवतरण → (अंतर)
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज


स्वार्थ मात्र पूरा हुने भए
एकले दोस्राको पिठयूँमा
छुरा घस्न
आपसमै तँछाड-मछाड गरिरहने
राष्ट्रिय चरित्र हाम्रो
अत्यन्त उदात्त छ ।