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सूरज ऊगो हो केवड़ा के री परत / मालवी

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   ♦   रचनाकार: अज्ञात

सूरज ऊगो हो केवड़ा के री परत
म्यानो रजाम सुहावनो
तम जागो हो सूरज जी हो राम
तम जागो ही गणपत जी हो राम
तम घर हो परजा केरो राज
तम जागो हो फलाणा जी हो राज
तम बैठो हो अक्खी बड़ की छाँह
तम लीजो हो श्रीकृष्ण को नाम
दीजो हो सूर्या गाय को दान
सूरज ऊग्यो के वड़ा के री परत
म्यानो श्याम सुहावणो
तम जागो हो फलाणा राम भांड
तम बैठो हो धतूरा अरंडिया छाँव
तम लई करवो मुख धोवी
तम लीजो अल्ला-खुदा को नाम
तम दीजो हो तमारी माता को दान