राजस्थानी लोकगीत ♦ रचनाकार: अज्ञात
चोखा तो चांवल हल्दी पीला, जा म्हारां भंवरा नूतबा।
तू तो नूतरे पाटल तो बिंदायक, बरजो सत्ती सेडल।
पित्तर बाबो, सारा देवता, जा घर बिरद उतावली।
तू तो नूतरे दशरथ जी रा रामचन्द्र वे म्हारै।
ब्याब रचावसी, म्हारे जान जिमावसी।
नोट- सभी के नाम लें।