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ख़ाक बसर ले आई है / अब्दुल हमीद
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ख़ाक बसर ले आई है
राह किधर ले आई है
लिख के परों पर इक तितली
उस की ख़बर ले आई है
कितने सितारे ख़्वाबों के
गर्द-ए-सफ़र ले आई है
राज़ कोई इन आँखों का
शफ़क़-ए-सहर ले आई है
एक हवा कितनी यादें
मेरे घर ले आई है

