भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

आश्चर्य / छगनलाल सोनी

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

भीष्म नहीं चाहते थे
परिवार का बिखराव
कृष्ण नहीं चाहते थे
एक युग की समप्ति
धृतराष्ट्र नहीं चाहते थे
राज-पतन
द्रौपदी नहीं चाहती थी-
चीर हरण।

इसके बावजूद
वह सब हुआ
जो नहीं होना था

आज हमारा न चाहना
हमारी चुप्पी में
चाहने की स्वीकृति ही तो है

तालियों से झर रही है शर्म
उतर रहे हैं कपड़े
और देख रहे हैं हम
आश्चर्य की शृंखला में
जुड़ते हुए अपने नाम।