भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
इलाही तू सुन ले हमारी दुआ, हमें सिर्फ़ एक आसरा है तेरा / शैलेन्द्र
Kavita Kosh से
इलाही तू सुन ले हमारी दुआ
हमें सिर्फ़ एक आसरा है तेरा
तेरी रहमतें राह रोशन करें
सलामत रहे साया माँ-बाप का
इलाही तू सुन ले ...
हमसे लेकर उमर सारी नींद दे-दे उन्हें
दर्द उनके दे-दे हमें
बुरी ये घड़ी टाल दे ए ख़ुदा
इलाही तू सुन ले ...
नाज़ उठाए जिसने पाला प्यार हरदम दिया
हो न हमसे वो जुदा
तू उम्मीद का ये दीया मत बुझा
इलाही तू सुन ले ...
सिवा तेरे मालिक मेरा कौन है यहाँ
बेवफ़ा ये है जहाँ
कहीं तू भी हमको न देना भुला
इलाही तू सुन ले ...

