भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
"पेड़ / हरीश करमचंदाणी" के अवतरणों में अंतर
Kavita Kosh से
Neeraj Daiya (चर्चा | योगदान) (नया पृष्ठ: <poem>पेड़ कट रहा था और मेरे पास शब्द नहीं थे लकड़हारे के विरूद्व काट…) |
(कोई अंतर नहीं)
|
03:19, 26 मई 2011 के समय का अवतरण
पेड़ कट रहा था
और मेरे पास शब्द नहीं थे
लकड़हारे के विरूद्व
काट रहा था
वह तो ठेकेदार के लिए
मैंने गौर से देखा उसे
लगा वह खुद भी कट रहा था
साथ साथ
और उसका कटना
पेड़ के कट कर गिर जाने के बाद भी जारी था

