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"पेड़ / हरीश करमचंदाणी" के अवतरणों में अंतर

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(नया पृष्ठ: <poem>पेड़ कट रहा था और मेरे पास शब्द नहीं थे लकड़हारे के विरूद्व काट…)
 
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03:19, 26 मई 2011 के समय का अवतरण

पेड़ कट रहा था
और मेरे पास शब्द नहीं थे
 लकड़हारे के विरूद्व
काट रहा था
वह तो ठेकेदार के लिए
मैंने गौर से देखा उसे
लगा वह खुद भी कट रहा था
साथ साथ

और उसका कटना
पेड़ के कट कर गिर जाने के बाद भी जारी था