|संग्रह=काका तरंग / काका हाथरसी
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रोजाना हम बंबा पर ही घूमा करते<br>
उस दिन पहुँचे नहर किनारे<br>
उसकी भी हो जाए सफाई।’<br>
‘बोलो-बोलो, जल्दी बोलो ?’<br>
ड्राइवर बाबूसिंह कह रहा-<br>
तेल अधिक खाती है गाड़ी ?’<br>
‘काका जी तुम बूढ़े हो गए,<br>