भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
"विहान की मोटरगाड़ी / अनुभूति गुप्ता" के अवतरणों में अंतर
Kavita Kosh से
Sharda suman (चर्चा | योगदान) ('{{KKGlobal}} {{KKRachna |रचनाकार=अनुभूति गुप्ता |अनुवादक= |संग्रह=...' के साथ नया पृष्ठ बनाया) |
(कोई अंतर नहीं)
|
18:41, 2 मई 2017 का अवतरण
एक था तोता, मिटठू राजा,
बजा रहा है मुख से बाजा।
पिंजरे में है प्यारा झूला,
खुशियों से है कितना फूला।
टाँय टू, टाँय टू, गाना गाता,
उसका सुर है बहुत सुहाता।
घर वालों का बहुत चहेता,
राम-राम ये सबको कहता।
खुल गया जब दरवाजा,
मिटठू राजा बाहर आया,
आसमान की ओर निहारा,
फिर निज पंखो को फैलाया।
उसको नीला नभ था भाया।।
इतने में आया इक बच्चा,
मन का था जो सीधा-सच्चा।
उसने मिट्ठू को ललचाया,
तोता भी लालच में आया
पिंजड़े में फिर बन्द कर दिया।
अब तोता मन में पछताया।।

