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बाँझ हो गइल बा, संवेदना के गाँव / मनोज भावुक
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बाँझ हो गइल बा, संवेदना के गाँव
नेह हो गइल बा, बबूरवा के छाँव
प्यार-प्रीत के जमीन रेह हो गइल बा
आत्मा मरल मशीन देह हो गइल बा
लेत केहू नइखे इंसानियत के नाँव !
करे जे अगोरिया से चोर हो गइल बा
देश प लुटेरवन के जोर हो गइल बा
कोरा में के लइका के जाई केने पाँव ?
जाति-पाति,धरम के उठेला लहरिया
रोटी बिना लइका के अँइठे अंतडिया
कउवन के सभवा में होला काँव-काँव !
टुकी-टुकी गउवाँ आ टुकी-टुकी घर घरवा
घरवा में घरवा आ ओहू में दररवा
'भावुक' जिनिगिया ई लागी कवने ठाँव ?

