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अज अविनाशी अखिल भुवनपति / हनुमानप्रसाद पोद्दार

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(राग वागेश्वरी-ताल झूमरा)

अज अविनाशी अखिल भुवनपति मायापति स्वतन्त्र भगवान।
 प्रकट हु‌ए निज लीलासे ही चिदानन्द-विग्रह द्युतिमान॥
 लीला ललित दिव्य ब्रजमें कर भक्तको कर शुचि रस-दान।
 पहुँचे द्वारावती, रचे लीलाके अद्भुत अमित विधान॥
 कुञ्रुक्षेत्रकी समर-भूमिमें बने पार्थ-सारथि तज मान।
 शरणागतको वरद-हस्त हो करते अक्षय अभय-प्रदान॥