भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार
Roman

ऊढ़ा बरनन / रसलीन

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

सीप के सुभ व बाढ़ो कानन कों चाव यह,
मुकुत से बैन रसलीन जून के लहिए।
दृगन चकोरन को चोंब यह कौहुँ देखो,
चंद सो बदन दुख कदन को चहिए।
अंतर की बिथा न जनाई जात औरन सों,
तोहि हितू जानि सखी बात यह कहिए।
ऐसो ही उपाय कछु दीजिए बताय मोहि
जाते बेग जाइ पिय दोऊ पाय गहिए॥43॥