(राग आनन्द-ताल त्रिताल)
कान्ति धवल कर्पूरकुन्द-सम पूर्ण-चन्द्र-उज्ज्वल आनन।
वीणा पुस्तक-माला-धारिणि, परम सुशोभित दिव्य वसन॥
षोडशदल-कमलासन सुन्दर हंसवाहिनी कल्याणी।
तम-नाशिनि सद्बुद्धि-प्रदायिनि जय-जय जयति देवि वाणी॥
(राग आनन्द-ताल त्रिताल)
कान्ति धवल कर्पूरकुन्द-सम पूर्ण-चन्द्र-उज्ज्वल आनन।
वीणा पुस्तक-माला-धारिणि, परम सुशोभित दिव्य वसन॥
षोडशदल-कमलासन सुन्दर हंसवाहिनी कल्याणी।
तम-नाशिनि सद्बुद्धि-प्रदायिनि जय-जय जयति देवि वाणी॥