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गाऊँ विजय भारती गान / नाथ कवि

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शताब्दियों के बाद गुलामी तजदी हिन्दुस्तान॥गाऊँ.
अमर शहीदों की गाथा को सुनो लगा के कान।
कहाँ गये राणा प्रताप और कहाँ सिबा बलवान॥
कहाँ हकीकतराय गये जिन तज दीन्हे निज प्रान।
कहाँ गये गुरुगोबिन्द के सुत तजी नहीं जिन आन॥गा.

आजादी का वृक्ष लगाया नौरोंजी गुण खान।
सींच हरा किया, तिलक गोखले, जानै सभी जहान।
लाला, देशबन्धु, मोती का सब करते सम्मान॥
वीर भगतसिंह बोस आजादी पर हो गये गुर्बान॥गाऊँ

भारत माँ के लाल अनेकों हुए शहीद जवान।
हाय हमारे राष्ट्र पिता का आता है जब ध्यान॥
शांति अहिंसा की पोषक थी जिनकी नीति महान।
कातिल ने हिन्दूपन पर भी काला किया निशान॥गा.

चलते वक्त करी चालाकी बटवा पाकिस्तान।
धन्य जवाहर राजाजी कों जो चाणक्य समान॥
कहैं ‘नाथ’ कवि काश्मीर में हम जीते मैदान।
क्या कर सकै निजाम बिचारा दो दिनका महमान॥गा.