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गीतावली पद 71 से 80 तक/पृष्ठ 5

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राग कान्हरा
सीय स्वयम्बरु, माई दोउ भाई आए देखन |
सुनत चलीं प्रलदा प्रमुदित मन,
प्रेम पुलकि तनु मनहुँ मदन मञ्जुल पेखन ||

निरखि मनोहरताई सुख पाई कहैं एक-एक सों,
भूरिभाग हम धन्य, आलि ! ए दिन, एखन|
तुलसी सहज सनेह सुरँग सब
सो समाज चित-चित्रसार लागी लेखन ||