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जब तलक विचार बदलब नै / रामदेव भावुक

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कोय कीमत पर कीमत नै रुकत’, जब तलक बजार बदलबॅ नै
चलतॅ नै हुकुम हुकूमत पर, जब तलक सरकार बदलबॅ नै

लगाम बदलि केॅ सोचै छॅ तों
घोड़ा के चाल बदलि जैत
पेट मे गमछा बान्हि लेबॅ त’
भूखक मिजाज बदलि जैत’

बिगड़ल छॅ चाल बिगड़ले रहत’, जब तलक सवार बदलब नै

छुधा जराय के सोचैं छॅ तों
घ’र के चुलहा जरि जैत
नमक गलैबॅ पानी मे ते’
पेट के पिल्हा गलि जैत’

छुधा जरै छॅ जरते रहतॅ जब तलक विचार बदलबॅ नै

नियोजन के मंतर सें सोचै छ’
बेकारी के बिक्ख उतरि जैत
मुर्गी के अण्डा कटबैबॅ त’
की गत व्यवस्था मरि जैत’

टिकल व्यवस्था टिकले रहत’, जब तलक अधार बदलबॅ ने

क्राइम पर राइफल छॅ जिंदा
थाना जब सस्पीशन पर
लूट मे छूट तॅ रहबे करत’
छॅ जब देश कमीशन पर

जोर जुलुम पर जोर नै चलत’, जब तलक अधिकार बदलबॅ नै

पूँजी के ई लतरल लत्तर
तोंय सोचै छॅ जरि जैत’
देखलैबॅ अंगुरी तॅ भावुक
शोषण के बतिया सड़ि जैत’

लतरल लत्तर लतरले रहत’, जब तलक लतसार बदलबॅ नै