Last modified on 30 जून 2016, at 23:40

ताज़िया / शरद कोकास

दहकते अलाव से
बड़ों की देखा-देखी
गुज़रते बच्चे
नंगे पांव दौड़ते
ताज़िये के पीछे

बड़ों की तरह छाती पीटना
नकल उतारना
ढोल-ताशों की गूंज
भीड़-भाड़ शोर-शराबा
भाता उन्हें

अलाव से गुज़रते हुए
नन्हें के पांव में
चिपकता अंगारा
छटपटाता पटकता पांव
पूछता छाती पीटने का मतलब

अलाव से गुज़रते हुए वह।

-1993