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विनयावली / तुलसीदास / पद 61 से 70 तक / पृष्ठ 2

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पद 63 से 64 तक

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बंदौ रधुपति करूना-निधान।
जाते छूटै भव-भेद-ग्यान।।

रघुवंश-कुमुद-सुखप्रद निसेस।
सेवत पद-पाथोज-भृंग।

लावन्य बपुष अगनित अनंग।।

अति प्रबल मोह-तम-मारतंड।
अग्यान-गहन-पावक प्रचंड़।।

अभिमान-सिंधु-कुंभज उदार।
सुररंजन, भंजन भूमिभार।।

रागासि-सर्पगन-पन्नगारि।
कंदर्प-नाग-मृगपति, मुरारि।।

भव-जलधि-पोत चरनारबिंद।
जानकी-रवन आनंद-कंद।।
हनुमंत-प्रेम-बापी-मराल।

निष्काम कामधुक गो दयाल।।
त्रैलोक-तिलक, गुनगहन राम।
कह तुलसिदास बिश्राम-धाम।।