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ये शाम-ए-गम गुज़ार मेरे साथ-साथ चल / पुष्पराज यादव

ये शाम-ए-गम गुज़ार मेरे साथ-साथ चल
ऐ पंछियों की डार मेरे साथ-साथ चल

तन्हा सफ़र तवील है मैं ऊब जाऊँगा
ऐ सरफिरी बयार मेरे साथ-साथ चल

सूरज के आसपास बसायेंगे एक नगर
इन बादलों के पार मेरे साथ-साथ चल

इस ज़िन्दगी की धूप में कर शुक्र जो मिलें
कुछ पेड़ सायादार मेरे साथ-साथ चल

फिर उसकी ओर जैसे मैं खिंचता चला गया
गूँजी थी इक पुकार मेरे साथ-साथ चल

है राह-ए-इश्क कू-ब-कू मुश्किल भी सख्त भी
तू चल सके तो यार मेरे साथ-साथ चल