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{{KKGlobal}}{{KKRachna|रचनाकार=ओम पुरोहित ‘कागद’ |संग्रह=}}{{KKCatKavita}}<poem>खुदा ख़ुदा देता है
सब को
दो-दो हाथ
दुआ-दया-खिदमत
इनायत के लिए
फ़िर भी
कुछ लोग
कर लेने का
भ्रम पालते हैं
फ़िर
उठ ही जाते हैं हाथ
बद सबब में.।
</poem>