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हाथ-1 / ओम पुरोहित ‘कागद’

148 bytes added, 16:57, 16 जुलाई 2012
{{KKGlobal}}{{KKRachna|रचनाकार=ओम पुरोहित ‘कागद’ |संग्रह=}}{{KKCatKavita‎}}<poem>खुदा ख़ुदा देता है
सब को
दो-दो हाथ
दुआ-दया-खिदमत
इनायत के लिए
 
फ़िर भी
कुछ लोग
कर लेने का
भ्रम पालते हैं
 
फ़िर
उठ ही जाते हैं हाथ
बद सबब में.
</poem>
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