Changes

'{{KKGlobal}} {{KKRachna |रचनाकार=सलमान अख़्तर }} {{KKCatGhazal}} <poem> ये तमन्ना ...' के साथ नया पन्ना बनाया
{{KKGlobal}}
{{KKRachna
|रचनाकार=सलमान अख़्तर
}}
{{KKCatGhazal}}
<poem>
ये तमन्ना है के अब और तमन्ना न करें
शेर कहते रहें चुप चाप तक़ाज़ा न करें

इन बदलते हुए हालात में बेहतर है यही
आईना देखें तो ख़ुद अपने को ढूँडा न करें

तू गुरेजाँ रही ऐ ज़िंदगी हम से लेकिन
कैसे मुमकिन है के हम भी तुझे चाहा न करें

इस नए दौर के लोगों से ये कह दे कोई
दिल के दुखड़ों का सर-ए-आम तमाशा न करें
</poem>
Delete, Mover, Protect, Reupload, Uploader
2,244
edits