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प्रिय जब तुम पास थे! / कविता भट्ट
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03:17, 2 मई 2018
प्रिय जब तुम पास थे।
क्या होगा
क्या
कभी
पुनर्मिलन
अब नित्यप्रति है यही प्रश्न
निरुत्तर तुम्हारे-मेरे अधरों के उसी दिन से प्रयास थे।
प्रिय जब तुम पास थे।
</poem>
वीरबाला
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