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भवानी मुक्ति दातृ, जगत का कल्याण कर ।
आसुरी सब वृतियों से मनुजता का त्राण कर ।।
तू सुधा की धार माते,
सृष्टि की पतवार माते ।
भाव रुपा शब्द रुपा,
सत्य की रखवार माते
खिलखिलाती दनुजता पर, बाण का संधान कर ।
माँ भवानी मुक्ति दातृ, जगत का कल्याण कर ॥
तू ही आदि अन्त तू ही,
सुक्ष्म तू स्थूल तू ।
सिद्धि रुपा शक्ति रुपा,
तू शिखर और मूल तू ।
हो त्रितापों का शमन, उर्जापूरित प्राण कर।
माँ भवानी मुक्ति दातु. जगत का कल्याण कर ॥
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