भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए

Changes

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज
मा सब रहैं फँसे
अब छोटभैया ठग नेता
गाँवैंम सब गाँवैम आय बसे
जाल रचैं स्वारथ की खातिर
इनते बिधिनौ हारा।