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|रचनाकार=बेनी
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[[Category:पद]]{{KKCatPad}}<poeMpoem>करि की चुराई चाल सिंह को चुरायो हरि की चुराई लंक, दूध शशि को चुरायो रंग, मुख नासा चोरी कीर कीकी। पिक को ::पिकको चुरायो बैन, मृग को चुरायो नैन, ::दसन अनार, हाँसी हंसी बीजुरी गँभीर कीअधीर की॥ कहे कवे ‘बेनी’ कहै कवि ‘बैनी’ बेनी व्याल की ब्याल सों चुराय लीनीलीन्हों, रति रति सोभा रती रती शोभा सब रति के सरीर कीशरीर की। ::अब तो कन्हैया जी कन्हैयाजू को चित हू चित्तहू चुराय लीनोलीन्हों, चोरटी ::छोरटी है गोरटी या छोरटी अहीर की चोरटी अहीरकी॥ </poeMpoem>