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करि की चुराई चाल, सिंह को चुरायो कटि / बेनी

करि की चुराई चाल हरि की चुराई लंक,
शशि को चुरायो मुख नासा चोरी कीर की।
पिकको चुरायो बैन मृग को चुरायो नैन,
दसन अनार हंसी बीजुरी अधीर की॥
कहै कवि ‘बैनी’ बेनी ब्याल सों चुराय लीन्हों,
रती रती शोभा सब रति के शरीर की।
अब तो कन्हैयाजू को चित्तहू चुराय लीन्हों,
छोरटी है गोरटी या चोरटी अहीरकी॥