भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए

Changes

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

डूब नहाऊँ / कविता भट्ट

126 bytes added, 05:52, 11 मार्च 2021
'''देखो, खोजो स्वयं को'''
'''मेरे भीतर।'''
21
मेरे भीतर।
21
मुझे स्वीकार
आपका उपकार
जीवन- सार !
 
</poem>