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{{KKGlobal}}{{KKRachna|रचनाकार: [[=तेजेन्द्र शर्मा]][[Category:कविताएँ]]}}[[Category:तेजेन्द्र शर्मा]]<poem>जिन्दगी आई जो कल मेरी गलीबंद किस्मत की खिली जैसे कली
~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~ज़िन्दगी तेरे बिना कैसे जियूं समझेगी क्या तू इसे ऐ मनचली
जिन्दगी आई जो कल मेरी गली<br>देखते ही तुझको था कुछ यूं लगाबंद किस्मत की खिली मच गई थी दिल में जैसे कली<br><br>खलबली
ज़िन्दगी तेरे बिना कैसे जियूं <br>मैं रहूं करता तुम्हारा इन्तज़ारसमझेगी क्या तू इसे ऐ मनचली<br><br>तुम हो बस, मैं ये चली और वो चली
देखते ही तुझको था कुछ यूं लगा<br>तुमने चेहरे से हटायी ज़ुल्फ़ जबमच गई थी दिल में जैसे खलबली<br><br>जगमगाई घर की अंधियारी गली
मैं रहूं करता तुम्हारा इन्तज़ार<br>छोड़ने की बात मत करना कभीमानता हूं तुम हो बस, को मैं ये चली और वो चली<br><br>अपना वली
तुमने चेहरे से हटायी ज़ुल्फ़ जब<br>जगमगाई घर की अंधियारी गली<br><br> छोड़ने की बात मत करना कभी<br>मानता हूं तुम को मैं अपना वली<br><br> चेहरा यूं आग़ोश में तेरे छिपा <br>मौत सोचे वो गई कैसे छली<br><br/poem>
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