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|रचनाकार=बेनी
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{{KKCatKavita}}[[Category: कवित्त]]
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हाव भाव विविध दिखावै भली भाँतिन सोँ सों,::मिलत न रतिदान जोग सँग जामिनी ।जामिनी।सुबरन भूषन सवाँरे सँवारे ते विफल होत ,::जाहिर किये ते हँसैँ हँसैं नर गजगामिनी ।गजगामिनी।रहै मन मारे लाज लागत उघारे बात ,::मन पछितात न कहत कहूँ भामिनी ।भामिनी।बेनी कवि कहैँ कहैं बड़े पापन तेँ तें होत दोऊ ,::सूम को सुकवि औ नपुँसक को कामिनी ।कामिनी।
'''बेनी का यह दुर्लभ छन्द श्री राजुल मेहरोत्रा के संग्रह से उपलब्ध हुआ है।
</Poem>
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