डूबते सूरज ने
ज़िन्दगी से पूछा
मैं तो चला
तुम क्या करोगी अब
क्या चाँद से बातें करते हुए
हवा के पंखों पर सवार
बादलों की डोली में
निकलोगी सैर के लिए
अरमान अपनी जगह
अपनी जगह इच्छाएँ
बुझे हुए चूल्हे की हँसी
अपनी जगह।
-1996
डूबते सूरज ने
ज़िन्दगी से पूछा
मैं तो चला
तुम क्या करोगी अब
क्या चाँद से बातें करते हुए
हवा के पंखों पर सवार
बादलों की डोली में
निकलोगी सैर के लिए
अरमान अपनी जगह
अपनी जगह इच्छाएँ
बुझे हुए चूल्हे की हँसी
अपनी जगह।
-1996