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दुल्हन / मंजुश्री गुप्ता

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दिल तेरा, मेरा घर आँगन
देख बनी, मैं तेरी दुल्हन
माथे तेरे, प्रेम की बिंदिया
नैनो में लज्जा का कजरा
कान-तेरी आवाज के झुमके
बाल तेरी खुशबू का गजरा
हाथों - तेरे नाम की मेंहदी
रोम रोम में अंग अंग में
रचा रंग है तेरे रंग का
तू सागर मैं नदिया तेरी
हृदय नयन से देख पिया
तेरी दुल्हन कैसी है निखरी
तेरे छाँव की ओढ़ चुनरिया