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10:18, 18 अप्रैल 2021 {{KKGlobal}}
{{KKLokRachna
|भाषा=मैथिली
|रचनाकार=अज्ञात
|संग्रह= संस्कारपरक गीत / मैथिली लोकगीत
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<poem>
मरबा पर बैसल छथि बरुआ भिखारी बैन क
बरुआ भिखारी बैन क, बरुआ भिखारी बैन क
मरबा पर बैसल...
बरुआ के दादी भीख लेने ठार छथि
भीखो नै लै छथि बरुआ ,भिखारी बैन क
मरबा पर बैसल छथि...
बरुआ के नानी भीख लेने ठार छथि
सोना के चेन मंगै छथि बरुआ भिखारी बैन क
मरबा पर बैसल...
बरुआ के अम्मा भीख लेने ठार छथि
भीख में मधुर मंगै छथि बरुआ भिखारी बैन क
मरबा पर बैसल...
बरुआ के फुआ भीख लेने ठार छथि
भीखो संग आशीष मंगै छथि बरुआ ,भिखारी बैन क
मरबा पर बैसल......</poem>