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प्रीत रो पानो : 1 / मदन गोपाल लढ़ा

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|संग्रह=म्हारै पांती री चिंतावां / मदन गोपाल लढ़ा
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थारो प्रीत रो पानो
म्हैं सावळ संभाळ राख्यो है
समंदर बण जावै
ओळूं रै आंगणै।
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