Changes

यूँ निकला सूरज / अशोक लव

794 bytes added, 07:10, 23 अगस्त 2010
नया पृष्ठ: {{KKRachna |रचनाकार=अशोक लव |संग्रह =लड़कियाँ छूना चाहती हैं आसमान / अशोक …
{{KKRachna
|रचनाकार=अशोक लव
|संग्रह =लड़कियाँ छूना चाहती हैं आसमान / अशोक लव
}}
{{KKCatKavita‎}}
<poem>

रात की काली चादर उतारकर
भागती भोर
सूरज से जा टकराई
बिखर गए सूरज के हाथों के रंग

छितरा गए आकाश पर
पर्वतों पर, झरनों पर नदी पर
नदी की लहेरों पर
धरती के वस्त्र पर, रंग

छू न सका सूरज भोर को
डांट न सका सूरज भोर को
और
आकाश पर निकल आया
</poem>
270
edits