भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए

निर्माण का गीत / केदारनाथ अग्रवाल

Kavita Kosh से
Dkspoet (चर्चा | योगदान) द्वारा परिवर्तित 08:58, 9 जनवरी 2011 का अवतरण (नया पृष्ठ: {{KKGlobal}} {{KKRachna |रचनाकार=केदारनाथ अग्रवाल |संग्रह=कुहकी कोयल खड़े पेड़ …)

(अंतर) ← पुराना अवतरण | वर्तमान अवतरण (अंतर) | नया अवतरण → (अंतर)
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

आओ रचना रचाएँ,
चारु चातुरी दिखाएँ,
ज्ञान, कर्म की भुजाएँ
वर्तमान को झुलाएँ
स्वर्ग भूमि को बनाएँ
सुख पाएँ दीन दुखिया।

आओ सपना जगाएँ
शूल-धूल से उठाएँ,
मोरपंख से सजाएँ
प्रेम-बाँसुरी बजाएँ,
नाच जाए मनबसिया।

आओ बगिया लगाएँ,
फूल-पंखुरी खिलाएँ,
पात-पात को बजाएँ
राग-रागिनी जिलाएँ
सूर्य-चंद्र मुस्कराएँ
रंग-मंच बने दुनिया।