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ईश्वर के घर लूट हुई / गोपालप्रसाद व्यास

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एक दिन ईश्वर के घर लूट हुई-
चूहा दांत ले भागा
बिल्ली मूंछें
खुदा स्टोर तलाश करने लगा
किससे पूछें?
ऊंट ने उठाकर
उसे अपने पेट में फिट कर लिया था
हाथी ने बुद्धि का बंडल
अपने कब्जे में कर लिया था,
घोड़े ने शक्ति
कुत्ते ने भक्ति
सियार ने संगीत
हिरनी ने अनुरक्ति
सूअर ने सृजन
बंदर ने तोड़-फोड़
शुतुरमुर्ग ने पलायन
लोमड़ी ने जोड़-तोड़
गाय ने श्रद्धा
भालू ने ताड़ी का अद्धा
गधे ने सहनशीलता
कुतिया ने अश्लीलता
शेर ने सम्मान
देसी पिल्ले ने अपमान........
जब खजाना खाली होगया
पहुंचा इन्सान।

खुदा बोला-
इन्सानियत तो रही नहीं
उसे तो जानवर ले गए
अब तो हमारे पास
हैवानियत, खुदगर्ज़ी
और बे-मौसम के काम-क्रोध ही रह गए हैं
चाहो तो ले जाओ!
मनुष्य बोला-लाओ, जल्दी लाओ!