भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
हरिने आदर दिया जिसे / हनुमानप्रसाद पोद्दार
Kavita Kosh से
Sharda suman (चर्चा | योगदान) द्वारा परिवर्तित 21:36, 9 जून 2014 का अवतरण ('{{KKGlobal}} {{KKRachna |रचनाकार=हनुमानप्रसाद पोद्दार |अनुवादक= |स...' के साथ नया पन्ना बनाया)
(राग शंखध्वनि-ताल त्रिताल)
हरिने आदर दिया जिसे, वह है गरीब भी अति धनवान।
हरिने प्यार किया जिससे, वह हुआ मूर्ख भी अति मतिमान॥
हरिने अपना कहा जिसे, वह भाग्यहीन सौभाग्य-निधान।
हरिने जिसे हृदय चिपटाया, उसके कोई नहीं समान॥
भाग्य-पुण्य, गुण-गौरव-सब सेवन करते उसकी पद-रज।
साधक-सिद्ध, प्रसिद्ध देव-किन्नर, ऋषि-मुनि, सुर-अधिपति, अज॥